Sunday, October 04, 2009

चिटठी आयी है ...पंकज उधास


Pankaj Udhas
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चिटठी आयी है ...


चिटठी आयी है आयी है चिटठी आयी है,

चिटठी आयी है वतन से चिटठी आयी है,

बडे दिनों के बाद, हम बेवतनों को याद.. वतन कि मिटटी आयी है,

चिटठी आयी है ...……
उपर मेरा नाम लिखा है,

अंदर ये पैगाम लिखा है,

ओ परदेस को जाने वाले,

लौट के फिर ना आने वाले,

सात समुंदर पार गया तू,

हमको जिंदा मार गया तू

खून के रिश्ते तोड गया तू,

आंख मैं आंसू छोड गया तू,

कम खाते हैं कम सोते हैं,

बहुत ज्यादा हम रोते हैं!

चिटठी आयी है ...……
सूनी हो गयी शहर कि गलियाँ,

काटें बन गयीं बाग कि कलियाँ,

कह्ते हैं सावन के झूले,

भूल गय तू हम नही भूले,

तेरे बिन जब आयी दिवाली,

दीप नहिं दिल जले हैं खाली,

तेरे बिन जब आयी होली,

पिचकारी से छूटी गोली……

पीपल सूना पनघट सूना घर शम्शान का बना नमूना,

फसल कटी आयी बैसाखी तेरा आना रह गया बाकि!

चिटठी आयी है ...…
पहले जब तू खत लिखता था,

कागज में चेहरा दिखता था,

बंद हुआ ये मेल भी अब तो,

खतम हुआ ये खेल भी अब तो…

डोली मे जब बैठी बहना,

रस्ता देख रहे थे नैना,

मैं तो बाप हुँ मेरा क्या है,

तेरी मां का हाल बुरा है,

तेरी बीवी करती है सेवा,

सूरत से लगती है बेवा…

तूने पैसा बहुत कमाया,

इस पैसे ने देश छुडाया,

पछी पिंजरा तोड के आ जा…

आजा उमर बहुत है छोटी,

अपने घर में भी है रोटी,चिटठी आयी है

चिटठी आयी है आयी है चिटठी आयी है

चिटठी आयी है वतन से चिटठी आयी है

चिटठी आयी है ……
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 चाँदी जैसा रंग है तेरा ...

चाँदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल

एक तु ही धनवान है गोरी, बाकि सब कंगाल

चाँदी जैस रंग है तेरा, सोने जैसे बाल

एक तु ही धनवान है गोरी, बाकि सब कंगाल

एक तु ही धनवान है गोरी, बाकि सब कंगाल
जिस रस्ते से तु गुजरे,वो फूलों से भर जाये…


जिस रस्ते से तु गुजरे,वो फूलों से भर जाये,

तेरे पैर कि कोमल आहट सोते भाग जगाये,

जो पत्थर छू ले गोरि तु वो हीरा बन जाये,

तू जिसको मिल जाये वोह,

तू जिसको मिल जायेवो हो जाये मालामाल्…

एक तु ही धनवान है गोरी, बाकि सब कंगाल

चाँदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल

एक तु ही धनवान है गोरी, बाकि सब कंगाल
जो बे-रंग हो उस पर क्या क्या रंग जमाते लोग…


जो बे-रंग हो उस पर क्या क्या रंग जमाते लोग,

तू नादां न जाने कैसे रूप चुराते लोग,

नजरें भर भर देखें तुझको आते जाते लोग…

छैल छबीली रानी थोडा……

छैल छबीली रानी थोडाघूंघट और निकाल्,

एक तु ही धनवान है गोरी, बाकि सब कंगाल

चाँदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल,

एक तु ही धनवान है गोरी, बाकि सब कंगाल…
धनक घट कलियां और तारे सब हैं तेरे रूप…


धनक घट कलियां और तारे सब हैं तेरे रूप,

गजलें हों या गीत हों मेरे सब में तेरा रूप..

युं ही चमकती रहे हमेशा तेरे हुस्न कि धूप

तुझे नजर न लगे किसी कि,

तुझे नजर न लगे किसी किजिये हजारों साल
एक तु ही धनवान है गोरी, बाकि सब कंगाल 
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ज़रा आहिस्ता चल


दर्द की बारिश मद्धम सही ज़रा आहिस्ता चल
दिल की मिट्टी है अभी तक नम ज़रा आहिस्ता चल

तेरे मिलने और फिर तेरे बिछड़ जाने के बीच
फासला रुसवाई का है कम ज़रा आहिस्ता चल

अपने दिल में नहीं है उसकी महरूमी की आग
उस की आंखों में भी है शबनम ज़रा आहिस्ता चल

कोई भी हो हमसफर राशिद न हो खुश इस कदर
अब के लोगों में वफ़ा है कम ज़रा आहिस्ता चल
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चुपके चुपके सखियों से वो बातें करना भूल गई



चुपके चुपके सखियों से वो बातें करना भूल गई
मुझको देखा पनघट पे तो पानी भरना भूल गई

पहले शायद उसको मेरे चेहरे का अंदाज़ ना था
मुझसे आँखें टकराईं तो खुद पे मरना भूल गई

सच पूछो तो मेरी वजह से उसको ऐसा रोग लगा
काजल मेहंदी कंगन बिंदिया से संवरना भूल गई


क्या जाने कब उससे मिलने आ जाऊं इस ख्वाहिश में
छत पर बैठी रहती है वो छत से उतरना भूल गई

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